मेरी पहली रात का किस्सा


Antarvasna, kamukta: मेरी कुछ समय पहले ही बैंक में जॉब लगी मेरी जब पहली जॉइनिंग हुई तो  मैं बैंक में गई और मेरा पहला ही दिन था हमारे बैंक मैनेजर ने मेरी सबसे मुलाकात करवाई और पहला दिन मेरा बहुत ही अच्छा रहा। मुझे करीब 10 दिन हो चुके थे और 10 दिन बाद बैंक में ही हमारे साथ काम करने वाले एक मेरे ही उम्र के लड़के से मेरी मुलाकात हुई वह छुट्टी पर गए हुए थे लेकिन जब पहली बार मैं विजय से मिली तो विजय से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे नहीं मालूम था कि विजय को मैं दिल से चाहने लगूंगी। विजय और मेरे बीच अच्छी दोस्ती भी होने लगी थोड़े ही समय में हम लोग बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे मैं चाहती थी कि मैं विजय को अपने दिल की बात बता दूं। एक दिन लंच टाइम में हम लोग साथ में बैठे हुए थे उस दिन मैंने सोच लिया था कि मैं विजय को अपने दिल की बात बता दूंगी लेकिन मैं इस बात से अनजान थी कि विजय तो किसी और लड़की को ही पसंद करते हैं। यह बात उस दिन विजय ने मुझे बताइ और उसके कुछ दिनों बाद ही जब मैं बैंक से घर लौट रही थी तो विजय ने मुझे कहा कि मैं आपको घर तक छोड़ देता हूं। मैंने विजय को कहा नहीं मैं चली जाऊंगी विजय ने उस दिन मुझे घर तब छोड़ दिया और रास्ते में हम लोगों की काफी बात हुई।

जब भी मैं विजय के साथ होती तो मुझे बहुत अच्छा लगता लेकिन मैंने विजय से अपने दिल की बात नहीं की थी क्योंकि विजय के जीवन में कोई और लड़की थी और मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से विजय की जिंदगी में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी आए। विजय ने एक दिन मुझे माधुरी से मिलाया जब विजय ने मुझे माधुरी से मिलाया तो मुझे माधुरी से मिलकर अच्छा लगा। विजय कहने लगे कि मैं और माधुरी जल्दी शादी करने वाले हैं उन दोनों ने अपने जीवन में बहुत सारे सपने देखे थे लेकिन जल्द ही उन दोनों का सपना चकनाचूर होने वाला था। हालांकि मैं ऐसा कभी भी नहीं चाहती थी कि विजया और माधुरी के बीच में किसी भी प्रकार की कोई समस्या हो लेकिन माधुरी के पिता जी विजय के साथ माधुरी का रिश्ता नहीं करवाना चाहते थे क्योंकि वह लोग एक दूसरे को पहले से ही जानते थे और विजय के पिताजी और माधुरी की पिताजी के बीच कभी अच्छी बात थी ही नहीं इस वजह से उन दोनों के बीच वह रिश्ता हो ना सका और उन दोनों को अलग होना पड़ा।

विजय इस बात से बहुत ही उदास थे वह मुझे हमेशा इस बात को लेकर कहते कि राधिका यदि मेरी शादी माधुरी से नहीं हो पाएगी तो मेरा जीवन अधूरा ही रह जाएगा। मैंने विजय को बहुत समझाया और आखिरकार वह दिन भी आ गया जब माधुरी की सगाई किसी और लड़के के साथ हो गई। इस बात से विजय पूरी तरीके से टूट चुके थे मैंने विजय को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन विजय कहां किसी की बात मानने वाले थे। कुछ दिनों के लिए उन्होंने ऑफिस से छुट्टी भी ले ली थी और विजय ने जब ऑफिस से छुट्टी ली तो मैं उनसे हर रोज फोन पर बात करती लेकिन विजय कुछ दिनों से मुझसे बात भी नहीं कर रहे थे और ना ही वह किसी के संपर्क में थे। थोड़े दिनों बाद वह ऑफिस लौटे तो मैंने विजय को कहा मैं आपको काफी दिनों से फोन कर रही थी लेकिन आपने फोन नहीं उठाया। विजय मुझे कहने लगे कि मैं कुछ दिनों के लिए जयपुर चला गया था मैंने विजय से कहा कि आप कुछ जरूरी काम से जयपुर गए हुए थे वह मुझे कहने लगे कि नहीं मैं अपने दोस्त के पास चला गया था। विजय के साथ जिस प्रकार की घटना बीत रही थी उससे वह बिल्कुल भी खुश नहीं थे और माधुरी उनकी जिंदगी से बहुत दूर जा चुकी थी। जल्द ही माधुरी की शादी होने वाली थी और इस बात से विजय इतने ज्यादा टूट चुके थे कि वह ऑफिस में बहुत ही कम बात किया करते थे। एक दिन मैंने विजय को समझाने की कोशिश की और कहा कि विजय देखो अब तुम्हें अपने जीवन में आगे तो बढ़ना ही पड़ेगा। विजय मेरा हाथ थाम ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ने लगे थे और हम दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थी विजय मुझसे हमेशा ही बात किया करते। हम दोनों की फोन पर भी बातें होने लगी थी मैं तो विजय को पहले से ही पसंद किया करती थी और मुझे यह बात भी अच्छे से पता थी कि यदि विजय से मुझे शादी करनी पड़ेगी तो मैं शादी करने के लिए भी तैयार थी लेकिन विजय के दिल में क्या चल रहा था मुझे अभी तक इस बारे में कुछ पता नहीं था।

एक दिन विजय ने मुझे कहा कि राधिका मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं विजय का यह फैसला सुनकर मैं खुश हो गई। मैंने तो कभी इस बात को लेकर सोचा भी नहीं था कि विजय और मेरे बीच इतनी नजदीकियां बढ़ जाएगी कि हम दोनों शादी करने के लिए तैयार हो जाएंगे। मेरे पिताजी इस शादी को कभी हां नहीं कहने वाले थे इसलिए मैंने विजय को कहा कि विजय मैं तुम्हारा साथ हमेशा देने के लिए तैयार हूं और मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं लेकिन मेरे पिताजी शायद इस बात को लेकर कभी भी हां नहीं कहेंगे। विजय मुझे कहने लगे कि राधिका लेकिन तुम तो मुझसे शादी करना चाहती हो ना मैंने विजय को कहा हां मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं आखिरकार हम दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ही ली। हालांकि इस बात से ना तो मेरे पिताजी खुश थे और ना ही मेरो मां खुश थी मैंने जब उन्हें इस बारे में बताया तो उन्होंने मुझे कहा कि बेटा तुमने यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं किया। मैंने उन्हें कहा पापा आप ही तो मेरी शादी के लिए तैयार ही नहीं हो रहे थे और मेरे पास इसके अलावा कोई भी रास्ता नहीं बचा था। जब मैंने अपने पापा से यह बात कही तो वह कहने लगे कि बेटा तुम लोगों ने शादी कर ली है तो मेरे पास भी शायद अब और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

उन्होंने हम दोनों को स्वीकार कर लिया था और हम दोनों बहुत खुश थे मैं विजय के साथ अपना नया जीवन शुरू करने लगी थी और हमारे ऑफिस में भी सब लोगों ने हमें हमारे नए जीवन को लेकर बधाइयां दी थी। हम दोनों की शादी हो चुकी थी और शादी के पहले दिन जब हम दोनों एक ही कमरे में अकेले थे तो विजय ने मुझसे कहने लगे राधिका जब से तुम मेरे जीवन में आई हो तब से मैं माधुरी को भूल चुका हूं। मुझे यह बात बिल्कुल भी पता नहीं थी तुम्हारे मेरी जिंदगी में आने से मैं माधुरी को भूल जाऊंगा। मैंने विजय को कहा देखो विजय आज हम इस बारे में बात ना करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा विजय भी शायद इस बात को समझ चुके थे और हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे लेकिन तभी विजय ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे हाथ को थाम लिया। मैं विजय की बाहों में आने की कोशिश करने लगी लेकिन विजय ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मेरे होठों को किस करने लगे। वह मेरे होठों को चूमते उससे मैं अपने अंदर की गर्मी को रोक नहीं पा रही थी और मैंने विजय से कहा तुम ऐसे ही मेरे होठों को किस करते रहो। विजय धीरे-धीरे मेरे कपड़े उतारने लगे विजय ने मेरी ब्रा और पैंटी को भी उतार दिया था पहली बार ही मैं किसी के सामने नंगी लेटी हुई थी। विजय ने जिस प्रकार से मेरे स्तनों का रसपान करना शुरु किया उससे मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढने लगी मैं भी गर्मी महसूस करने लगी। मैंने भी विजय के लंड को अपने हाथों में ले लिया और जब मैं विजय के लंड को हिलाने लगी तो वह मुझे कहने लगे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। विजय ने कहा मेरे लंड को मुंह के अंदर ले लो मैने विजय के लंड को चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और विजय बहुत ही ज्यादा खुश हो गए थे। मैंने विजय के लंड से पानी निकाल दिया था। विजय ने अब मेरी योनि को चाटना शुरू किया और जिस प्रकार से वह मेरी योनि को चाट रहे थे उससे मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रही थी।

मैंने विजय से कहा मै अपने आपको रोक नही पाऊंगी तुम ऐसे ही मेरी चूत को चाटते रहो। उसके बाद जब विजय अपने लंड को मेरी योनि के अंदर घुसाने लगे, धीरे धीरे विजय का लंड मेरी योनि के अंदर तक घुस चुका था। जब वह मुझे धक्के मारने लगे तो विजय ने कहा मुझे आज तुम्हारी चूत में लंड डालकर मजा आ गया। मै उनका पूरा साथ देने लगी विजय मुझे बहुत ही अच्छे से चोद रहे थे जिस प्रकार से वह मेरी चूत का मजा ले रहा है मैं बहुत ही ज्यादा खुश थी। विजय ने मेरा साथ बड़े अच्छे से दिया और वह मुझे कहने लगे मुझे तुम्हारी चूत मारकर बहुत अच्छा लग रहा है। वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहे थे थोड़ी ही देर बाद उनका वीर्य मेरी चूत के अंदर गिरने वाला था जब उनका वीर्य गिरा तो उनको बहुत अच्छा लगा। जिस प्रकार से विजय ने मेरी योनि के अंदर वीर्य को गिराया मै खुश थी। थोड़ी देर बाद हम दोनों ने दोबारा से सेक्स करना शुरू किया और विजय ने मुझे घोड़ी बना दिया लेकिन मैंने देखा कि मेरी योनि से खून निकल रहा है।

विजय ने अब धीरे-धीरे मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डालना शुरू कर दिया था। विजय का मोटा लंड मेरी योनि के अंदर तक जा चुका था वह मुझे तेज गति से धक्के मारने लगे। मुझे जिस प्रकार से वह धक्के मार रहे थे उस से मै बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी और अपनी चूतडो को मैं विजय से मिलाने लगी। विजय मुझे तेजी से धक्के मार रहे थे तो मुझे बड़ा आनंद आ रहा था। वह मुझे कहने लगे मुझे तुम्हें धक्के मारने में बहुत ही मजा आ रहा है मैंने विजय को कहा मुझे भी तुम्हारे साथ सेक्स करने में बहुत अच्छा लग रहा है। पहली बार ही हम दोनों के बीच सेक्स संबंध बना था और हम दोनों ने अपनी पहली रात को बड़ा ही यादगार बनाया। उसके बाद मुझे विजय ने कहा राधिका मैं तुम्हारा धन्यवाद देना चाहता हूं जो तुमने मेरा इतना साथ दिया। मैंने विजय को कहा मैं तुम्हारी पत्नी हूं और हम दोनों एक दूसरे का साथ पाकर बहुत ही ज्यादा खुश हैं। विजय मेरा बहुत ध्यान रखते हैं वह मुझे कभी भी किसी चीज की कोई कमी महसूस नहीं होने देते हम दोनों के बीच हर रोज सेक्स होता रहता है।




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